Longevity Example in KP Astrology


#1

Longevity Example in KP Astrology
जैसा कि प्रश्न है , इस हिसाब से सर्वप्रथम जातक की आयु पर विचार कर लेना उचित होगा।
आयु के लिए 1 , 3 , 8 भावो के उपस्वामियो पर विचार किया जाता है ।
1 – लग्न , 3 – अष्टम से अष्टम – शरीर का हटाया जाना .
8 – आयु भाव ।
लग्न स्थिर राशि का है । इसके लिये 9 भाव बाधक , 2 , 7 मारक , 6 , 8 , 12 नकारात्मक और 1, 3 , 5 , 10 , 11 सकारत्मक होंगे ।
अच्छी आयु के लिए 1 , 3 , 8 भावों के उपस्वामियो का सम्बंध सकारात्मक भावों से होना चाहिये ।
लग्न का उपस्वामी सूर्य है।
सूर्य 4
शुक्र 1 , 4 , 6
शुक्र 1 , 4 , 6
6 भाव नक्षत्र और उपस्वामी में मौजूद है। 4 भाव को सबकुछ समाप्ति के भाव भी माना गया है ।
3 भाव का उपस्वामी शुक्र है।
शुक्र 1 , 4 , 6
शुक्र 1 , 4 , 6
चन्द्र 3 , 6
शुक्र अपने ही नक्षत्र में है तो उपस्वामी इन्वॉल्वमेंट बताएगा और उप – उपस्वामी रिजल्ट देगा , शुक्र का उप – उपस्वामी भी शुक्र ही है।
शुक्र के परिवार में 4 , 6 भाव है 6 भाव ग्रह , नक्षत्र , उप नक्षत्र , उप – उप नक्षत्र में उभर कर आया है , 1 , 3 भाव सकारात्मक है।
8 भाव का उपस्वामी चन्द्र है ।
चन्द्र 3 , 6
गुरु 6 , 8 , 11
शनि 9 , 10
ग्रह में 6 , नक्षत्र में 6 , 8 – नकारात्मक , 9 – बाधक मौजूद है , 10 – सकारात्मक है।
कुल मिलाकर जातक अल्पायु है – लगभग 33 – 35 वर्ष आयु ।
6 का सम्बंध 1 से होना बीमारी को सूचित करता है। 6 का उपस्वामी भी वही है जो 3 का है – शुक्र .
शुक्र 1 , 4 , 6 , 3 से लिंक में है।
6 भाव मे राहू की उपस्थिति डॉक्टर को सही बीमारी पकड़ने नही देती ।
अष्टमेश गुरु पर शनि दृष्टि दीर्घकालिक बीमारी को सूचित कर रही है।
दशा भी शनि चल रही है ।
शनि 9 , 10
गुरु 6 , 8 , 11
शुक्र 1 , 4 , 6
1 , 6 , 8 का सम्बंध है।
अभी गोचर में शनि केतू के नक्षत्र में चल रहे है , उपस्वामी शनि ही है जो आगे गुरु के उप में जायेगा गुरु 6 , 8 का कार्येश है ।
केतु 6 , 12 नकारात्मक , 9 – बाधक का कार्येश होने के साथ साथ सकारत्मक भावों 3 , 5 , 10 , 11 भावों का भी कार्येश है। अतः स्थिति एक जैसी बनी हुई है।
सूर्य भुक्ति 07 – 09 – 2018 तक है ।
सूर्य लग्न का सबलार्ड भी है ।
सूर्य 4
शुक्र 1 , 4 , 6
शुक्र 1 , 4 , 6
बीमारी से राहत / ठीक होने के भाव 5 , 11 / 5 , 9 / 9 , 11 नही है।
6 भाव मे शुक्र की राशि तुला है – जातक की आंतो / किडनी में छुपे हुए रोग की वजह से उसकी ऐसी हालत है।
मंगल भुक्ति में जातक को कुछ राहत मिलेगी लेकिन पूरी तरह से नही क्योकि दशास्वामी शनि की मंजूरी नही है। गोचर भी तभी काम करता है जब D B A की मंजूरी हो ।
पूर्ण रूप से ठीक होने के योग नही दिख रहे ।